"जीव दया और आतम पूजा"
कबीरपंथ के पंद्रहवें वंशप्रतापाचार्य, परम पूज्य पंथ श्री 108 हुजूर प्रकाशमुनि नाम साहब के प्रखर तेजोमय स्वरूप एवं सोलहवें नवोदित वंशप्रतापाचार्य, पंथ श्री उदितमुनि नाम साहब के आशीर्वाद और प्रेरणा से कबीर धर्मदास वंशावली मिशन का प्रादुर्भाव हुआ है।
यह मिशन सदगुरु कबीर साहब और धनी धर्मदास साहब के बताए आदर्शों से प्रेरित होकर, जगत कल्याण और विश्व शांति के उद्देश्य से एक वैश्विक सामाजिक संगठन के रूप में उदित हुआ है।
कबीर धर्मदास वंशावली मिशन का मूल उद्देश्य मानव के अंदर मानवता का संचार करना है। कबीर साहब की शिक्षाओं को आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिक बनाते हुए, इसका लक्ष्य है ऐसे चरित्रवान लोगों को तैयार करना जो मानवता एवं सभी जीवों की निःस्वार्थ सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित हों।
कबीर धर्मदास वंशावली मिशन का मोटो "जीव दया और आतम पूजा" एक गहन और प्रेरणादायक संदेश है जो कबीर साहब के समग्र दर्शन को एक ही पंक्ति में संजोता है। यह पंक्ति कबीर सागर से ली गई है, जो कबीर साहब की वाणी का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।